Tuesday, 16 December 2014

"आतंकवादियों ने बच्चों को लाइन लगाने को कहा ताकि गोली मार सकें। बच्चों ने समझा कि अंकल कोई गेम खेलने वाले हैं।"

जो देश आतंक का अड्डा बना हुआ है आज उसी के देश में ऐसे दुखद घटना घटि जिसने इंसानियत को हिला दिया। ऐसा इससे पहले दुनिया के किसी कोने में शायद नहीं हुआ होगा।

ऐसा भी कोन सा जिहाद है। ऐसा भी कोन सा मकसद है, जिसके लिए छोटे मासूम बच्चे जिनके हाथों में बन्दूक नहीं बल्कि पेंसिल थी। उन्हें भी इन दरिंदो ने गोली मार दी, अरे कोई समझाओ ऐसा क्या सिखाया गया था उन दरिंदो को कि उनके हाथ भी नहीं कापे उन छोटे बच्चों के सिर में गोली मारने से पहले।
आज पहली बार पाकिस्तान के लिए उन माँ बाप के लिए मेरी आँखों में आसु है, जिन्होंने पेशावर हमले में अपना भविष्य खो दिया।
अरे अब तो समझ जा ये ना समझ पाकिस्तान की जिनके खुद के घरों में आतंक का साया लहराता हो उन्हें दूसरे देश में आतंक नहीं फैलाना चाहिए, ज़रूरत है पाकिस्तान को वह भारत के मद्दद से निस्तानाबूद करदे इस आतंकवाद को अपने देश से वहाँ भी इंसान बस्ते हैं, उन्हें भी हक़ है का सपने देखने का अपना नाम करने का अगर इसी तरह रहा तो पाकिस्तान का वजूद ही नहीं रहेगा क्योंकि अगर बच्चे नहीं होंगे तो वजूद कैसे बनेगा।

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